बादलों के नीले झुरमुट में
सितारों ने महफिल सजाई
बतियाते गुपचुप से कुछ
झीनी सी ओट से नीचे झाँका
उनकी खिलखिलाहट किसी के लबों पर मुस्कराहट बन कर उतरी
रेशम सी किरणें किसी के दिल में मचली
वो नर्म चांदी के तार मन में लगे उलझने
मदहोशी के पैमाने छलक कर
ख़्वाबों के दरख्त पर लगे गिरने
ख़्वाबों के दरख्त लगे बढ़ने
बढ़ते बढ़ते जा पहुंचे वहाँ तलक
जहाँ है सितारों की चमक
कुछ और नहीं
ऐसे में तुम भी होते बस........
Wednesday, 3 September 2008
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