मोक्ष दो प्रभु मुझे मोक्ष दो
जीते जीते थक गई हूँ
मृत्यु वरण को आतुर हूँ
अपने चरणों का सामीप्य दो
मोक्ष दो प्रभु मुझे मोक्ष दो
जिंदगी की वीरान छाया
मुख-मंडल पर बिखरी है
मृत्यु की स्वागतोन्मुख आंखों में
बस थोडी चमक शोभित है
मुझे जिंदगी से द्वेष है पर जीवन मुझ पर मोहित है
इस जीवन से मुक्ति दो
मोक्ष दो प्रभु मुझे मोक्ष दो
ब्रह्मांड के इस अनजान स्थल पर
कैसे मैं पहुँच गई
क्योंकर मैं जीती जागती कठपुतली
बन नृत्य करने लगी
ब्रह्मा के इस श्राप से मुक्ति प्रदान करो
मृत्यु का वर मुझको दो
मोक्ष दो प्रभु मुझे मोक्ष दो
हृदय विदारक चीखों से
गूँज उठा है आसमान
दिल के JHANJHAAVATON से
हिल उठी dha ra mahaan
कोई राह नहीं SHESH अब
मृत्यु का मुझे DAAN दो
मोक्ष दो प्रभु मुझे मोक्ष दो
Wednesday, 3 September 2008
बस तुम......
बादलों के नीले झुरमुट में
सितारों ने महफिल सजाई
बतियाते गुपचुप से कुछ
झीनी सी ओट से नीचे झाँका
उनकी खिलखिलाहट किसी के लबों पर मुस्कराहट बन कर उतरी
रेशम सी किरणें किसी के दिल में मचली
वो नर्म चांदी के तार मन में लगे उलझने
मदहोशी के पैमाने छलक कर
ख़्वाबों के दरख्त पर लगे गिरने
ख़्वाबों के दरख्त लगे बढ़ने
बढ़ते बढ़ते जा पहुंचे वहाँ तलक
जहाँ है सितारों की चमक
कुछ और नहीं
ऐसे में तुम भी होते बस........
सितारों ने महफिल सजाई
बतियाते गुपचुप से कुछ
झीनी सी ओट से नीचे झाँका
उनकी खिलखिलाहट किसी के लबों पर मुस्कराहट बन कर उतरी
रेशम सी किरणें किसी के दिल में मचली
वो नर्म चांदी के तार मन में लगे उलझने
मदहोशी के पैमाने छलक कर
ख़्वाबों के दरख्त पर लगे गिरने
ख़्वाबों के दरख्त लगे बढ़ने
बढ़ते बढ़ते जा पहुंचे वहाँ तलक
जहाँ है सितारों की चमक
कुछ और नहीं
ऐसे में तुम भी होते बस........
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